कथा
वरलक्ष्मी का अर्थ है वर देने वाली लक्ष्मी। स्कंद पुराण में शिव यह व्रत पार्वती को बताते हैं, और मगध की चारुमती के माध्यम से कहते हैं — जिसने व्रत रखा, जिसका घर सोने से भर गया, और जिसने वह विधि अपने तक न रखकर पड़ोसिनों को सिखा दी।
इस दिन आठों लक्ष्मियों का एक साथ आवाहन होता है: धन, धान्य, धैर्य, विजय, संतान, विद्या, और वे दो जो बाकी सबको काम का बनाती हैं — आरंभ की लक्ष्मी और टिकने वाली लक्ष्मी।
यह मंदिर का नहीं, घर का त्योहार है। देवी को घर बुलाया जाता है, कलश में बिठाया जाता है, दिन भर मेहमान की तरह रखा जाता है, और धन्यवाद देकर विदा किया जाता है।
