कथा
यह दिन मोमो नो सेक्कू, आड़ू उत्सव के रूप में शुरू हुआ — चीन से आए पाँच ऋतु-उत्सवों में से एक। काग़ज़ की गुड़िया शरीर पर फेरकर उसका दुर्भाग्य उसमें उतारा जाता और नदी में बहा दिया जाता; कुछ जगहें आज भी नगाशी-बिना के रूप में उन्हें बहाती हैं।
एदो काल में गुड़ियाँ बहना छोड़कर घर में रखी जाने लगीं और हेइआन वेश में सम्राट-साम्राज्ञी और उनके दरबार का सीढ़ीदार प्रदर्शन बन गईं। पहला सेट बेटी के पहले साल में नाना-नानी या दादा-दादी देते हैं, और उसके बाद हर फ़रवरी में वह बाहर आता है।
सजावट जल्दी लगती है और तुरंत उतरती है। दिन बीतने के बाद भी सजी रही तो बेटी का विवाह टलता है — बाक़ी जो भी हो, यह एक नियम हर परिवार निभाता है।
