कथा
महावीर ने बिहार के पावापुरी में दो दिन बिना रुके अंतिम उपदेश दिया, और अमावस्या के तड़के देह त्यागकर मोक्ष पाया, हर पुनर्जन्म से मुक्ति। सुन रहे अठारह राजाओं ने दीये जलाए ताकि उनका प्रकाश बुझा न लगे; जैन कथा में इसी कारण इस रात दीये जलते हैं।
उनके प्रमुख शिष्य गौतम स्वामी को उसी रात केवल ज्ञान हुआ, इसलिए अगली भोर साल का पहला दिन मानी जाती है, और जैन व्यापारी उसी दिन नए बही-खाते खोलते हैं।
