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महावीर निर्वाण (जैन दीपावली)

महावीर निर्वाण (जैन दीपावली)

कार्तिक अमावस्या को पावापुरी में महावीर की मुक्ति — जैन दीपावली, उस ज्योति के लिए जले दीये जो परे चली गई।

कब पड़ता है

कार्तिक की अमावस्या, दिवाली की रात, अक्टूबर या नवंबर में। जैन संवत (वीर निर्वाण संवत) अगली सुबह से गिना जाता है।

फला पंचांग आपके अपने शहर के लिए सही दिन बताता है; ऊपर के चंद्र और सौर नियम वही हैं जिनसे वह गणना करता है।

कथा

महावीर ने बिहार के पावापुरी में दो दिन बिना रुके अंतिम उपदेश दिया, और अमावस्या के तड़के देह त्यागकर मोक्ष पाया, हर पुनर्जन्म से मुक्ति। सुन रहे अठारह राजाओं ने दीये जलाए ताकि उनका प्रकाश बुझा न लगे; जैन कथा में इसी कारण इस रात दीये जलते हैं।

उनके प्रमुख शिष्य गौतम स्वामी को उसी रात केवल ज्ञान हुआ, इसलिए अगली भोर साल का पहला दिन मानी जाती है, और जैन व्यापारी उसी दिन नए बही-खाते खोलते हैं।

दिन कैसे मनाया जाता है

  • मंदिरों में रात भर प्रार्थना और महावीर के अंतिम उपदेश उत्तराध्ययन सूत्र का पाठ।
  • घरों और मंदिरों में दीये, और पावापुरी में जल मंदिर, कमल-सरोवर के बीच का वह मंदिर जहाँ उनका दाह हुआ, रात भर रोशन।
  • निर्वाण के तड़के के समय मंदिर में निर्वाण लड्डू का अर्पण।
  • अगली सुबह पूजा के बाद नए साल का बही-खाता खोला जाता है, और जैन संवत का वर्ष बढ़ता है।

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कथा
महावीर का अंतिम चातुर्मास · हिंदी मेंपावापुरी का अंतिम उपदेश और मुक्ति की वह रात जिसे जैन दीपावली रखती है।साभार: Thavva Thhui Mangalam - An ode to the infinite · YouTube पर देखें
उत्सव
पावापुरी में दीपावली · हिंदी मेंमहावीर के निर्वाण की रात पावापुरी के कमल-सरोवर वाले जल मंदिर में भीड़।साभार: Tushar Jain · YouTube पर देखें

और दीपों के त्योहार

फला पंचांग यह दिन आपके अपने शहर के हिसाब से दिखाता है — सूर्योदय, तिथि और पाँचों अंग, धरती पर कहीं भी। पंचांग कैसे काम करता है, देखें →