कथा
वृंदावन के ग्वाले वर्षा के देवता इंद्र को अपनी वार्षिक भेंट की तैयारी कर रहे थे, जब बालक कृष्ण ने पूछा कि वे उस दूर के देवता को क्यों धन्यवाद देते हैं, उस पहाड़ को क्यों नहीं जिसकी घास उनकी गायों को खिलाती है। उन्होंने भेंट गोवर्धन पर्वत को कर दी। इंद्र ने सात दिन के तूफ़ान से जवाब दिया, और कृष्ण ने पहाड़ को बाएँ हाथ की छोटी उँगली पर उठाकर गाँव के हर व्यक्ति और पशु पर छतरी की तरह तब तक थामे रखा जब तक इंद्र हार नहीं गए।
कथा अहंकार और शक्तिशाली के भय के विरुद्ध कही जाती है। तीर्थयात्री आज भी उस पहाड़ की परिक्रमा करते हैं, लगभग इक्कीस किलोमीटर की।
महाराष्ट्र और गुजरात में यही दिन बलि प्रतिपदा या पाडवा है, जब राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने लौटते हैं, और गुजरात में यह नए साल का पहला दिन है।
