कथा
जापान के आत्मसमर्पण के दो दिन बाद सुकर्णो और हत्ता ने जकार्ता में एक घर के सामने खड़े होकर दो वाक्यों की घोषणा पढ़ी। डच इसे मानने को तैयार नहीं थे और स्वतंत्रता का युद्ध चार साल और चला।
उस सुबह फहराया गया झंडा सुकर्णो की पत्नी फ़तमावती ने किसी से मिले सूती कपड़े से सिया था; हर साल वही मूल झंडा राष्ट्रपति भवन में निकाला जाता है।
